Auther vision

साथियों, नमस्कार।
मैं, स्वामी अनंत मैत्रेय, आपसे यह साझा करना चाहता हूँ कि मेरा दृष्टिकोण किसी भी प्रकार के राजनैतिक उद्देश्य से प्रेरित नहीं है। मेरा मूल उद्देश्य मानव समाज में बढ़ते हुए धर्म-आधारित अलगाव को दूर करना और सम्पूर्ण मनुष्यता को एक सूत्र में बाँधने का प्रयास है।

इसी दिशा में मेरे प्रथम कदम के रूप में मेरी पुस्तकें “इस्लाम: समाधान या समस्या” और धर्म आत्मा और ईश्वर प्रकाशित की गई है। जिनमें मैंने मुहम्मद साहब को एक आत्मज्ञानी ऋषि के रूप में प्रस्तुत किया है और उनके बतलाए हुए मार्ग यानी की धर्म को प्रकाशित करने का प्रयास किया है। इसमें उनके धर्म आधारित दर्शन को समझने के लिए हिन्दू धर्म के अन्य आत्मज्ञानी ऋषियों की शिक्षाओं के साथ तुलनात्मक विश्लेषण भी किया गया है।

मेरा मानना है कि मुहम्मद साहब सहित सभी आत्मज्ञानी महापुरुषों की अंतरदृष्टि (दर्शन) मूल रूप से समान है। किन्तु देश, काल, व परिस्थितियों तथा भाषा की भिन्नताओं के कारण धर्म में विभाजन दिखाई देने लगता है। परिणामस्वरूप, हम धर्म को समरसता के बजाय अलगाव का माध्यम बना बैठे हैं।

जबकि सत्य यह है कि —

विज्ञान और धर्म, दोनों ही मनुष्यता को सुखी एवं समृद्ध बनाने के साधन हैं।

विज्ञान हमें अस्थायी सुख और भौतिक समृद्धि देता है, जिसके प्रभाव मे आकर हम धर्म को भूल जाते है यही कारण है की सभी आत्मज्ञानियों ने मृगमरीचिका कहा है।

वहीं धर्म हमें स्थायी सुख और आध्यात्मिक समृद्धि प्रदान करता है, जिसे सभी आत्मज्ञानी महापुरुषों ने स्वर्ग, जन्नत, प्रभु का राज्य अथवा परमपद के रूप में वर्णित किया है।